मेरा कुछ सामान लापता हैं।
किसी को कोई ख़बर, कोई पता है?
कुछ चीज़ें ग़ुम हैं, अब नहीं मेरे नज़र में।
शायद कोई ले गया, मेरी ग़ैर हाज़िरी में।
किससे शिक़ायत करूँ, कोई बता दे।
किस दरवाज़ा पे जाऊँ, उसका मुझे पता दे।
कौन है यहाँ, जो मेरा बस साथ दें?
मेरी मुश्किल को तोडा सा आसान कर दें।
मैं आज वही सामान ढूँढ रही हूँ।
मेरे दिन और मेरी रातें ढूँढ रही हूँ।
मेरा चेहरा, मेरा नाम ढूँढ रही हूँ।
मेरी पहचान, मेरा निशान ढूँढ रही हूँ।
मेरे जज़्बात, मेरे अरमान ढूँढ रही हूँ।
मेरी खामोशी की जुबां ढूँढ रही हूँ।
मेरी हसी, वो मुस्कान ढूँढ रही हूँ।
मेरे आँसू के फरमान ढूँढ रही हूँ।
मेरी मुहोब्बत, नाकामयाब ढूँढ रही हूँ।
मेरी नफरत, लाजवाब ढूँढ रही हूँ।
वो ख़फ़ा होने का अंदाज़ ढूँढ रही हूँ।
वो रूठने मनाने के हालात ढूँढ रही हूँ।
वो मेरी इज़्ज़त, और नाज़ ढूँढ रही हूँ।
वो मेरी साज़, और आवाज़ ढूँढ रही हूँ।
उस चाहत की ताक़त ढूँढ रही हूँ।
वो सच्ची सी मुहोब्बत ढूँढ रही हूँ।
वो मेरा वक़्त, वो मौक़ा ढूँढ रही हूँ।
वो मेरा चैन, वो आराम ढूँढ रही हूँ।
वो नाज़ुक, नादान ढूँढ रही हूँ।
वो हैरान, परेशान ढूँढ रही हूँ।
वो शिक़स्त, वो हार ढूँढ रही हूँ।
वो फ़तेह का एलान ढूँढ रही हूँ।
वो मेरे ऊपर लगे इलज़ाम ढूँढ रही हूँ।
वो इशारा, वो इल्हाम ढूँढ रही हूँ।
वो मीठी सी बात ढूँढ रही हूँ।
वो कड़वी सी वारदात ढूँढ रही हूँ।
वो गुस्सा, वो प्यार ढूँढ रही हूँ।
वो दिल ए बेक़रार ढूँढ रही हूँ।
वो मेरे किस्से, कहानियाँ ढूँढ रही हूँ।
वो हकीकत और राज़ ढूँढ रही हूँ।
वो मेरे नींद, मेरे ख़्वाब ढूँढ रही हूँ।
वो मेरे ख़्वाहिशें बेहिसाब ढूँढ रही हूँ।
वो बेसब्र सी तन्हाई ढूँढ रही हूँ।
वो महफ़िल की रुसवाई ढूँढ रही हूँ।
वो रिश्तों की गहराई ढूँढ रही हूँ।
वो मेरी डरी हुई परछाई ढूँढ रही हूँ।
वो भूली हुई यादें ढूँढ रही हूँ।
वो बिछड़े हुए साथी ढूँढ रही हूँ।
वो पहेली का सुलझाव ढूँढ रही हूँ।
वो जिगर की आग ढूँढ रही हूँ।
मेरे वालिदा और वालिद को ढूँढ रही हूँ।
मेरे भाई और बेहन को ढूँढ रही हूँ।
वो मेरा छोटा सा कमरा ढूँढ रही हूँ।
मेरे आंगन के वो गिने चुने फूल ढूँढ रही हूँ।
बचपन के दोस्तों को ढूँढ रही हूँ।
जवानी के यारों को ढूँढ रही हूँ।
वो सच्चे दुश्मनों को ढूँढ रही हूँ।
अनजानों में पहचानों को ढूँढ रही हूँ।
वो मेरे टूटते से रिश्तों को ढूँढ रही हूँ।
उस बेवफा सनम को ढूँढ रही हूँ।
उस अपने से ग़ैर को ढूँढ रही हूँ।
उस प्यारे से बैर को ढूँढ रही हूँ।
वो भूले हुए खेल ढूँढ रही हूँ।
वो शैतानियों के मेले ढूँढ रही हूँ।
मेरे गुड्डे गुड़ियाँ और रेल ढूँढ रही हूँ।
सिर्फ मुझे दिखने वाले परियों को ढूँढ रही हूँ।
वो सफर, वो रास्ते ढूँढ रही हूँ।
उस सफर के हमसफ़र को ढूँढ रही हूँ।
वो जन्नत का रास्ता, ढूँढ रही हूँ।
उस जहन्नम से दूरी, ढूँढ रही हूँ।
उस क़ब्र के बाग़, को ढूँढ रही हूँ।
उस खुदा के रसूल, को ढूँढ रही हूँ।
उन्हें बनाने वाले को, ढूँढ रही हूँ।
हाँ उस यक़ीन, को ढूँढ रही हूँ।
और भी बहुत कुछ, ढूँढ रही हूँ।
मुझको, मुझी में ढूँढ रही हूँ।
मुश्किल में आसानी, ढूँढ रही हूँ।
ईमानदारी, बेईमानी, में ढूँढ रही हूँ।
कोई नहीं जो मेरी मदद को आए।
मेरी तक़लीफ़ों से मुझे छुड़ाए।
आज उस किसी को ढूँढ रही हूँ।
हाँ -किसी में खुदा को ढूँढ रही हूँ।
ए खुदा क्या तू नहीं जानता हैं?
मेरी कमी मेरी खोज को नहीं पहचानता है।
मेरे दर्द और ग़म को तू ही तो मानता है।
तू ही तो मेरी मुश्किलों से बचने का रास्ता है।
मैं सब कुछ आज यहाँ ढूँढ रही हूँ।
मेरी ज़मीन और आसमां ढूँढ रही हूँ।
मेरा आज और कल ढूँढ रही हूँ।
तेरी रेहमत और बरक़त ढूँढ रही हूँ।
ए खुदा मैं मुझ में तुझी को ढूँढ रही हूँ।
मेरे रूह में तेरी हरकत को ढूँढ रही हूँ।
मेरे सवालों के जवाब ढूँढ रही हूँ।
मेरे ज़िन्दगी का हिसाब ढूँढ रही हूँ।
मेरी शायरी की वजह ढूँढ रही हूँ।
इन सवालों की बुनियाद ढूँढ रही हूँ।
मेरी शिकायतों का इलाज ढूँढ रही हूँ।
हाँ उस खुदा से सबका जवाब ढूँढ रही हूँ।
खुदा- मैं बस तुझे ढूँढ रही हूँ।
हाँ मैं, तुझ में खुदी को ढूँढ रही हूँ।
उलझन में हूँ, परेशान भी।
बेचैन भी हूँ, पशेमान भी।
गुनहगार भी हूँ, नाउम्मीद भी।
बेघर भी हूँ, शायद बेवजह भी।
दुआएँ माँगना चाहती हूँ, बेशुमार।
माफ़ी भी चाहती हूँ, तुझसे हज़ार।
तेरा रेहम चाहती हूँ, बेहिसाब।
तेरे हर सवाल का देना चाहती हूँ, सही जवाब।
नहीं चाहती हूँ, मेरे तेरे बीच, कोई पर्दा या हिजाब।
दाहिनी हाथ में चाहती हूँ, अपने अमाल की किताब।
दुआ बस यही की, मेरे सारे अच्छे हो सबाब।
ना बनूँ मैं, किसी के ज़िन्दगी में ख़राब जनाब।
खुशनसीब हूँ मैं, खुदा का बुलावा आया हैं।
नसीब बदलने वाला हैं, तेरा बुलावा आया हैं।
ज़िन्दगी सुलझने वाली हैं, तेरा बुलावा आया हैं।
सब साफ़ नज़र आने वाला हैं, तेरा बुलावा आया हैं।
दुआएँ क़ुबूल होने वाली हैं, तेरा बुलावा आया है।
उलझनें सुलझने वाली हैं, तेरा बुलावा आया है।
सब साफ़ नज़र आने वाला हैं, तेरा बुलावा आया है।
तेरे करीब आने वाली हूँ, तेरा बुलावा आया है।
ज़िन्दगी कामयाब होगी, उम्मीद जगी हैं।
सारी तमन्नाएँ पूरी होगी , उम्मीद जगी हैं।
जन्नत मेरे नाम होगी, उम्मीद जगी हैं।
मैं तेरे साथ होंगीं , उम्मीद जगी हैं।